देशलेटेस्ट

भारत में राजनीतिक चंदा: इलेक्टोरल बॉन्ड योजना के समाप्त होने के बाद की स्थिति।

भारत में चुनावी राजनीति में राजनीतिक फंडिंग किसी भी पार्टी के लिए उतनी ही ज़रूरी होती है जितनी इंसान के लिए ऑक्सीजन। बिना धन के न तो बड़े स्तर पर प्रचार संभव है और न ही संगठन को ज़मीन पर मज़बूती दी जा सकती है।

वित्त वर्ष 2024-25 के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस द्वारा Election Commission of India को सौंपी गई कॉन्ट्रिब्यूशन रिपोर्ट से अहम आंकड़े सामने आए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, BJP को 2024-25 में कुल ₹6088 करोड़ का चंदा प्राप्त हुआ, जबकि कांग्रेस को केवल ₹522 करोड़ की फंडिंग मिली।
ये आंकड़े इसलिए भी खास हैं क्योंकि 15 फरवरी 2024 को Supreme Court of India ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को खत्म कर दिया था। यानी ये फंडिंग ऐसे समय में आई है जब चुनावी चंदे की व्यवस्था पूरी तरह बदल चुकी है।

साल-दर-साल तुलना क्या कहती है?

अगर पिछले साल से तुलना करें तो तस्वीर और भी दिलचस्प हो जाती है:

BJP को 2023-24 में ₹3967 करोड़ से 2024-25 में बढ़कर ₹6088 करोड़। यानी पार्टी के चंदे में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है।
वहीं कांग्रेस को 2023-24 में ₹1129 करोड़ से 2024-25 में घटकर ₹522 करोड़। यानी कांग्रेस की फंडिंग लगभग आधी रह गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, चुनावी फंडिंग का सीधा असर पार्टियों की चुनावी रणनीति, प्रचार, ज़मीनी संगठन और डिजिटल कैंपेन पर पड़ता है। ऐसे में इन आंकड़ों का असर आने वाले चुनावों में साफ़ तौर पर दिख सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *